21 वर्ष की सतत साधना का फल है कविता।

KHABAR AAPTAK NEWS INDIA
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
 रिपोर्टर चेतन दास सुखानी

दतिया 21 वर्ष की सतत साधना का फल है कविता पर्व  -- तहसीलदार झा

डॉ.आलोक सोनी ने तहसीलदार अजय और टीआई धीरेन्द्र का किया सम्मान

                               ‌          ‌                             254 वां डॉ.सीकर स्मृति कविता पर्व भव्यता के साथ सम्पन्न                      
                                                                        दतिया /  अभूतपूर्व और अविस्मरणीय क्षण बन गया है कविता पर्व । साहित्य जगत में डॉ.आलोक जैसे विरले व्यक्तित्व कम दिखाई देते हैं वे लेखक कम, संस्थान अधिक है, उनके सानिध्य में , अनेक नवोदित कवियों ने सीखकर अच्छा मुकाम हासिल किया हैं  । आज डॉ.सोनी से सम्मान पाना मेरे जीवन का अनमोल क्षण है । पिछले 21 वर्ष की सतत साधना का फल है कविता पर्व  -   उक्त विचार डॉ. आलोक संस्थान के तत्वावधान में  न्यू दतिया पब्लिक स्कूल के परिसर में , डॉ. सीकर की  स्मृति में आयोजित 254 वें मासिक  कविता पर्व  के 21वर्ष पूर्ण होने के बाद आयोजित  डबल प्लेटिनम , गोल्डन जुबली  समारोह  में मुख्य अतिथि की आसंदी से दतिया ग्रामीण के तहसीलदार अजय कुमार झा ने व्यक्त किए  । अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष , अनेक इंटरनेशनल अवॉर्ड विनर प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. आलोक सोनी ने की । विशिष्ट अतिथि के रूप में दतिया कोतवाली के टी आई धीरेन्द्र मिश्रा उपस्थित थे । कविता पर्व का सफल संचालन प्रसिद्ध कवि डॉ. हरिकृष्ण हरि ने किया  । सुन्दर स्वर लहरी में तनु प्रताप सिंह गौर ने सरस्वती वंदना से कविता पर्व की  शुरुआत की । इस अवसर पर डॉ.आलोक सोनी ने उत्कृष्ट सेवा कार्यों से प्रभावित होकर , तहसीलदार अजय कुमार झा और टीआई धीरेन्द्र मिश्रा को शाल , श्रीफल , अंगपट्टिका उड़ाकर , डॉ.सीकर उत्कृष्ट सेवा सम्मान से सम्मानित किया तो वही अमर सिंह दिनकर ने डॉ आलोक सोनी, अजय झा , धीरेन्द्र मिश्रा के व्यक्तित्व कृतित्व को रेखांकित करते हुए कविता मय एक पोस्टर भेंट किया । ईमाम डॉ.माशूक अली  ने कहा - हमारी खुशकिस्मती है कि हम भारत में रहते हैं ।   सुप्रसिद्ध कवि डॉ.राज गोस्वामी ने कहा -- हमाये पांव पांव तुमाये हैं चरन ,ऐसी का बात है भैया रामचरन - बहुत सराही गई , बुन्देली कवि आचार्य पूरन चंद शर्मा ने कहा - वाह वाह रे मानव तूने क्या कर डाला ।  वीणा खुशबू ने कहा -- जिंदगी दोस्तों ख्वाबों से नही बनती । हेड कांस्टेबल  कवि सुघर सिंह रावत ने  कहा - छू के आई उसे वो हवा मिल गई । टीआई धीरेन्द्र मिश्रा ने कहा -- डॉ. आलोक सोनी और कविता पर्व  दोनों  देश विदेश में चर्चित हैं, डॉ.आलोक ने हमारा सम्मान करके हमारा मान बढ़ाया हैं ।   कविता पर्व अनूठा स्थापित सार्थक प्रयास है । श्यामलाल प्रजापति, दिनेश श्रीवास्तव  ने उत्कृष्ट विचार प्रस्तुत किए । अशोक उचाडिया  ने  रचना सुनाते हुए कहा -- वो भी तड़फ रहा है मेरा साथ छोड़ कर - सराही गई । महेंद्र कुशवाहा ने बेहतरीन रचना पाठ किया । पूर्व प्रबन्धक बी पी सेन ने कहा -- ठलुआ चिलुआ से उतरा रये । अल्ताफ हुसैन ने कहा - नाव तूफां में है मल्लाह को नींद आई है  । राजेंद्र शुक्ला ने कहा -- बुराईयों से कटके रहता हूं , इसलिए निखर के रहता हूं । इस अवसर पर बैकुंठ नारायण सिरोठिया  , तनु प्रताप सिंह , जय नगरिया , कृष्णा कुशवाहा  , देव प्रजापति ने अतिथियों का फूल माला पहनाकर स्वागत किया । आभार आदर्श दिनकर ने व्यक्त किया ।

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