अमोलपठा:-अमोलपठा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जंहा यदि बीमारी फैली तो जिले में बीमारी व कुपोषण से शुरू हो सकता है मौतो का सिलसिला और यदि यह शुरू हुआ तो 2014-15 के इतिहास को दोहरा सकता है। जिसमे जिला प्रशासन भी स्थिति को नही सम्भाल सके तब भोपाल के दर्जनों अधिकारी को महीनों तक डेरा डालना पड़ा था। स्वास्थ्य विभाग में चहेते व लेनदेन के फेर में कर्मचारियों को उनके मनमाने स्थान पर अट्टाचेमेंट करने से व्यवस्थाये बिगड़ने लगी हैं। कहने को अमोलपठा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है परन्तु यंहा पदस्थ चिकित्सक डॉ सुनील जैन को सतनवाड़ा अस्पताल में अटैच्ड कर रखा है। बीते दो माह पूर्व जनता की मांग पर सतनवाड़ा से अट्टाचेमेंट खत्म कर दिया गया फिर भी मिलीभगत से आज दिनांक तक अमोलपठा ड्यूटी पर एकदिन भी नही गए। वर्तमान में अस्पतालों में चिकित्सको की यह है स्थिति।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद सतनवाड़ा व उसके अधीन संस्थाओं में स्वीकृत पद -7 ,
कार्यरत चिकित्सक -5
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करेरा व उसके अधीन संस्थाओं (अमोलपठा सहित) में स्वीकृत पद-13,
कार्यरत-3
अमोलपठा में एक भी चिकित्सक नहीं होने से सभी आदिवासी झोलाछाप चिकित्सको के हवाले है। अभी वर्तमान में बर्षा से एकदम मरीजो का इजाफा हुआ है परंतु अस्पताल मे चिकित्सक नही होने से भुखमरी की कगार पर आदिवासी प्राइवेट चिकित्सक से कैसे इलाज करवाये।
जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि हालात को देखकर वँहा पर एक चिकित्सक की व्यवस्था की जाय जो मुख्यालय पर ही निवास करे।
यदि समय पर उचित कदम नहीं उठाए तो स्थिति हो सकती है भयाभय।??
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