KHABAR AAPTAK NEWS INDIA
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
रिपोर्टर चेतन दास सुखानी
*मौखिक वक्तव्य के लिए जोर्डन विश्वविद्यालय ने किया था आमंत्रित- भारत से मात्र दो वैज्ञानिकों को मिला था भाग लेने का आमंत्रण। भाग लेने के लिए डॉ कौशिक को आ. ए. यू . (फ्रांस) की ट्रेवल फैलोशिप*
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दतिया ।। स्थानीय शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय दतिया के भौतिकी विभागाध्यक्ष व खगोलविद डॉक्टर सुभाष कौशिक का जोर्डन
विश्वविद्यालय, एम्मान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठि *मिरिम -7 ( MEARIM -7 )* में शोध व्याख्यान सम्पन्न हुआ । जिसे 40 से अधिक देशों से आये वैज्ञानिकों ने खूब सराहा व उत्कृष्ट शोध की प्रशंसा की ।
अन्तर्राष्ट्रीय एस्ट्रोनोमिकल यूनियन, पेरिस, फ्रांस व अरब यूनियन फॉर एस्ट्रोनोमी एंड स्पेस साइंस (ए यू एस एस ) द्वारा आयोजित संगोष्ठि का आयोजन संयुक्त रूप से जोर्डन विश्वविद्यालय,एम्मान व शारजाह विश्वविद्यालय द्वारा जोर्डन की राजधानी एम्मान में सफलतापूर्वक किया गया ।
*मध्य पूर्व व अफ़्रीकी क्षेत्रीय आई. ए. यू. मीटिंग (MEARIM -7)* में विश्व के 100 के लगभग चुनिंदा वैज्ञानिकों को भाग लेने के लिए *अरब यूनियन फॉर एस्ट्रोनोमी एंड स्पेस साइंस* द्वारा शोध प्रस्तुत करने तथा भविष्य की खगोल विज्ञान व टेक्नोलॉजी की परियोजनाओं पर तथा क्षेत्र में बनाए जाने वाले नवीन एस्ट्रोनॉमिकल टेलीस्कोप परियोजनाओं पर विचार करने के लिए आमंत्रित किया गया था । जिसमें विश्व के 40 से अधिक देशों के शीर्ष वैज्ञानिकों ने भाग लिया और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में भविष्य की योजनाओं तथा वर्तमान शोध कार्य को प्रदर्शित किया । संगोष्ठी में एक स्पेस टेक्नोलॉजी को लेकर प्रदर्शनी भी लगाई गईं है ।
सहभागिता क्यों है महत्वपूर्ण
भारतीय वैज्ञानिकों को *मिरिम- 7 मीटिंग* में आमंत्रित किया जाना अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के शीर्ष नेतृत्व का द्योतक है । संगोष्ठि में अनेक देशों के वैज्ञानिकों से विमर्श तथा सहयोग न सिर्फ वैज्ञानिक बल्कि औद्योगिक एवं व्यावसायिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह साझेदारी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष-मंच पर एक मजबूत भूमिका निभाती है तथा भविष्य की चुनौतियों व योजनाओं को मूर्त रूप प्रदान करती है ।
शोध चर्चा के अतिरिक्त 14 नवंबर को सभी वैज्ञानिकों को यूनेस्को विश्व विरासत तथा विश्व के आश्चर्य में शामिल 2000 वर्ष से भी प्राचीन ऐतिहासिक स्थल पेट्रा का भ्रमण भी कराया जाएगा ।
*ब्रिक्स देशों में एस्ट्रोफिजिक्स व एस्ट्रोनोमी पर विशेष सत्र*
*मिरिम मीटिंग* के दौरान ब्रिक्स देशों में स्थापित ऐस्ट्रोनोमिकल सुविधाओं तथा भविष्य के प्रोजेक्ट पर भी चर्चा करने के लिए एक तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया । जिसमें ब्रिक्स फोरम के अध्यक्ष तथा सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी । मीटिंग में मध्य पूर्व अरब तथा अफ़्रीकी देशों में अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने तथा खगोल विज्ञान के लिए सहयोग व सुविधाओं को बढ़ाने का निर्णय लिया गया ।
इस यात्रा के लिए डॉ कौशिक को अंतरराष्ट्रीय ऐस्ट्रोनोमिकल यूनियन, फ्रांस तथा जोर्डन विश्वविद्यालय द्वारा ट्रेवल फैलोशिप प्रदान की गई है । डॉ कौशिक खगोल विज्ञान के क्षेत्र में लगभग तीन दशकों से शोध कार्य कर रहे हैं तथा अभी तक 18 से अधिक बार विदेशों में शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं ।इन सहभागिताओं के लिए विश्व के लगभग सभी प्रमुख संस्थानों जैसे नासा, आई. ए. यू. फ्रांस, कास्पार फ्रांस , जाक्सा जापान, जापान सोसाइटी फ़ार प्रमोशन आफ़ साइंस, अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन तथा रशियन संस्था से भी डा कौशिक को ट्रेवल फैलोशिप प्राप्त हो चुकी है ।
उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम में सहभागिता करने वाले मध्य प्रदेश के एकमात्र वैज्ञानिक है डॉ कौशिक । सूर्य द्वारा सतत रूप से उत्सर्जित टांजिएंट प्लाज्मा की घटनाओं का पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभाव व कास्मिक किरणों की फार्रबश हास्र (Forbush Decrease ) तथा धरती की सतह पर होने वाली जी. एल. ई. (Ground Level Enhancement Events ) प्रभावों से संबंधित अपने शोध कार्य को विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हुआ है । यह दतिया महाविद्यालय व शहर के लिए गौरव का विषय है ।
महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापकों व छात्रों ने डॉ कौशिक को बधाई देते हुए इसे महाविद्यालय, प्रदेश एवं देश के लिए गौरव की उपलब्धि बताया ।
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