*दतिया आयुर्वेद चिकित्सा को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने की मांग*

खबर आपतक न्यूज़ इंडिया
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
रिपोर्टर चेतन दास सुखानी

*आयुर्वेद चिकित्सा को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने की मांग*

दतिया राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में दतिया परिक्षेत्र के कई आयुर्वेद चिकित्सकों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंच कर माननीय राष्ट्रपति और माननीय प्रधानमंत्री जी को संबोधित कर
आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने विषयक ज्ञापन सौंपा।

आयुर्वेद को भारत की राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति के रूप में घोषित किए जाने की मांग को लेकर जिले के आयुर्वेद चिकित्सकों ने एकजुट होकर भारत के माननीय राष्ट्रपति एवं माननीय प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

आयुर्वेद चिकित्सकों ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन एवं समृद्ध चिकित्सा परंपरा है, जिसका मूल उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना ही नहीं, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा तथा रोगी के रोग का शमन करना है। आयुर्वेद में आहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या, जीवनशैली, औषधि एवं पंचकर्म सहित स्वास्थ्य संरक्षण और रोग प्रबंधन की व्यापक अवधारणा विद्यमान है।

ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग की गई कि आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति के रूप में मान्यता प्रदान करने की दिशा में आवश्यक नीतिगत कदम उठाए जाएं तथा आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के विकास, अनुसंधान, शिक्षा एवं चिकित्सकीय सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। चिकित्सकों ने संबंधित अधिकारी के सामने  कोरोना काल मे आयुर्वेद की भूमिका को पुनः स्मरण करते हुए बताया कि कोरोना में आयुर्वेद ने बहुत ही सराहनीय परिणाम दिए थे आम जनता ने जिन लोगों ने आयुर्वेद को अपनाया था वह या तो संक्रमित ही नहीं हुए और जो हो गए थे वह जल्दी स्वस्थ हुए। कई ऐसे रोगी जो कोरोना के बाद Black Fungus से ग्रसित हुए थे वह भी आयुर्वेद से ठीक हुए थे। आयुर्वेद ने ऐसी आपातकाल की स्तिथि में भी अग्निपरीक्षा में सफलता प्राप्त की थी अब समय आ गया कि आयुर्वेद भारत की राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित हो जिससे इसका व्यापक लाभ आम जनता को मिल सके।

चिकित्सकों ने कहा कि वर्तमान समय में जीवनशैली से संबंधित अनेक स्वास्थ्य समस्याओं के बीच निवारक एवं समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण का महत्व बढ़ रहा है। ऐसे में आयुर्वेद की वैज्ञानिक संभावनाओं पर उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देने, पारंपरिक ज्ञान के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण तथा आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ उचित समन्वय की आवश्यकता है।

ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्न मांगें रखी गईं—

1. आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति का दर्जा प्रदान किया जाए।
2. आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान को और अधिक सुदृढ़ किया जाए।
3. आयुर्वेद चिकित्सकों एवं चिकित्सा संस्थानों को आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
4. आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता, मानकीकरण एवं वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाए।
5. आयुर्वेद की निवारक एवं स्वास्थ्य संवर्धन संबंधी अवधारणाओं को जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में उचित स्थान दिया जाए।
6. आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की संभावनाओं को प्रमाण-आधारित अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित किया जाए।
7. आयुर्वेद चिकित्सकों की सेवाओं एवं उनके व्यावसायिक हितों से संबंधित विषयों पर आवश्यक नीतिगत निर्णय लिए जाएं।

आयुर्वेद चिकित्सकों ने कहा कि यह पहल किसी अन्य चिकित्सा पद्धति के विरोध में नहीं, बल्कि भारतीय चिकित्सा परंपरा और आयुर्वेद की संभावनाओं को उचित राष्ट्रीय महत्व प्रदान करने के उद्देश्य से की जा रही है। चिकित्सकों ने सरकार से इस विषय पर सकारात्मक एवं व्यापक विचार-विमर्श की अपेक्षा व्यक्त की।

इस अवसर पर जिले के अनेक आयुर्वेद चिकित्सक एवं आयुर्वेद से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे। चिकित्सकों ने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार आयुर्वेद के विकास और विस्तार के लिए आवश्यक कदम उठाएगी तथा भारत की इस प्राचीन चिकित्सा परंपरा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था में और अधिक प्रभावी भूमिका प्रदान की जाएगी।
डॉ रवि बघेल,डॉ संकेत मिश्र,डॉ कमलेश गुप्ता,डॉ प्रशांत शर्मा उपस्थित रहें। 

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