*दतिया के डाॅ.आलोक सोनी ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की शोधसंगोष्ठी में भारतीय साहित्य में राम कथा की परम्परा - पर रखे विचार *
खबर आपतक न्यूज़ इंडिया
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
रिपोर्टर चेतन दास सुखानी
दतिया । भारत अध्ययन केन्द्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के तत्वावधान में ,भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद ,नईदिल्ली के सहयोग से आयोजित "भारतीय संस्कृति की जययात्रा और रामत्व की प्रतिष्ठा " विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन , महामना सभागार में किया गया। संगोष्ठी का उद्घाटन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय काशी के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी एवं जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेई ने संयुक्त रूप से किया। राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में - भारतीय साहित्य में राम कथा की परंपरा , राष्ट्र निर्माण और रामत्व की परिकल्पना विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता बीएचयू के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सदाशिव कुमार द्विवेदी ने की। सत्र में अतिथि वक्ता के रूप में अनेक इंटरनेशनल अवार्ड विजेता अंतरराष्ट्रीय वक्ता डॉ. आलोक सोनी ने अपने शोध पत्र में कहा - कि राम की कथा केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि भारतीय जनमानस की चेतना का सांस्कृतिक व्याकरण है। वैदिक काल के संकेतों से लेकर वाल्मीकि, भवभूति, तुलसी, कंबन, कुमारदास, मैथिलीशरण गुप्त और नरेन्द्र कोहली तक राम कथा ने अनेक रूप बदले, परन्तु उसका मूल तत्व 'रामत्व' अक्षुण्ण रहा। राम कथा भारतीय साहित्य की सबसे दीर्घजीवी परम्परा है, क्योंकि यह किसी व्यक्ति की कथा न होकर एक मूल्य-दृष्टि है, एक जीवन-दृष्टि है, जो व्यक्ति को परिवार के लिए, परिवार को समाज के लिए और समाज को राष्ट्र के लिए जीना सिखाती है। राम है त्याग की अनुपम प्रतिमूर्ति " संगोष्ठी में अन्य वक्ताओं के रूप में - प्रो. सुमन कुमार झा, अध्यक्ष साहित्य विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली , डॉ. रमाकांत राय , विभागाध्यक्ष हिन्दी , राजकीय महिला पीजी कॉलेज, इटावा डॉ. देवशंकर नवीन , विभागाध्यक्ष , भारतीय भाषा केन्द्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली , डॉ. राम रघुवंश मणि शुक्ल, साहित्यकार, बहराइच ने भी अपने विचार रखे। सत्र का संयोजन डॉ. उत्तम कुमार द्विवेदी ने किया। संगोष्ठी के संयोजक शताब्दी फेलो डॉ. ज्ञानेन्द्र नारायण राय, भारत अध्ययन केन्द्र के समन्वयक डॉ. शरदेन्दु कुमार तिवारी एवं हिन्दी विभाग के प्रो. मनोज कुमार राय ने सभी अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र प्रदान कर किया। इस अवसर पर पूरे देश के विभिन्न विश्वविद्यालय के लगभग 80 उत्कृष्ट विद्वान ,शोधार्थी उपस्थित रहे ।

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