KHABAR AAPTAK NEWS INDIA
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
रिपोर्टर चेतन दास सुखानी
*टी ई टी परीक्षा - सेवारत शिक्षकों का अपमान*
दतिया सेवारत शिक्षकों पर TET परीक्षा थोपना उनके अनुभव, उनकी निष्ठा और उनके सम्मान पर सीधा प्रहार है।
20-25 साल का अनुभव क्या शून्य है?*
एक शिक्षक जो 25 साल से लगातार कक्षा में पढ़ा रहा है, बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट दे रहा है, चुनाव ड्यूटी, जनगणना, BLO का काम, मध्यान्ह भोजन तक संभाल रहा है, क्या अब उसको एक परीक्षा से साबित करना पड़ेगा कि उसे पढ़ाना आता है? जिस शिक्षक ने हजारों बच्चों को TET पास करवाने लायक बनाया, आज वही शिक्षक TET की लाइन में खड़ा है - इससे बड़ा अपमान क्या हो सकता है?
* नियुक्ति के समय की शर्त बाद में कैसे?*
हम सबकी नियुक्ति उस समय के नियमों के अनुसार हुई थी। उस समय जो योग्यता माँगी गई थी, हमने पूरी की थी। अब रिटायरमेंट के 5-7 साल पहले नया नियम लगाकर हमें फिर से परीक्षा में बैठाना न्याय नहीं, अन्याय है। यह तो नौकरी में रहते हुए दोबारा इंटरव्यू लेने जैसा है।
*. TET का उद्देश्य क्या है?*
TET का उद्देश्य नए अभ्यर्थियों की योग्यता जाँचना है, न कि 25 साल से पढ़ा रहे गुरुजनों को अपमानित करना। अगर सरकार को गुणवत्ता चाहिए तो प्रशिक्षण दे, संसाधन दे, कक्षाओं में छात्र-शिक्षक अनुपात ठीक करे। एक लिखित परीक्षा से गुणवत्ता नहीं आती।
* मानसिक प्रताड़ना*
55 साल के शिक्षक को, जो BP, शुगर का मरीज है, परिवार पाल रहा है, उसे कहा जा रहा है - पास नहीं हुए तो नौकरी गई। उसके मन पर क्या बीत रही है? क्या वह कक्षा में मन लगाकर पढ़ा पाएगा? *यह भय का माहौल शिक्षा* को खत्म कर देगा।
* हमारा विरोध TET से नहीं, थोपने से है*
हम TET के विरोधी नहीं हैं। हम नए लोगों के लिए TET का स्वागत करते हैं। लेकिन सेवारत शिक्षकों को इससे मुक्त रखा जाए। उनका अनुभव ही उनकी TET है। उनका रिजल्ट ही उनका प्रमाण पत्र है।
इसलिए सरकार से माँग है कि सेवारत शिक्षकों को TET से छूट दी जाए। उनका सम्मान बहाल किया जाए। गुरु का अपमान करके शिक्षा में सुधार नहीं हो सकता।
*अपने हक के लिए 30 अगस्त दिल्ली चलो*
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