सुप्रसिद्ध गीतकार स्व. श्री चंद्रशेखर मिश्र की स्मृति में काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित

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    दतिया सह संपादक चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव
ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव रिपोर्टर चेतन दास सुखानी

सुप्रसिद्ध गीतकार स्व. श्री चंद्रशेखर मिश्र की स्मृति में काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित
साहित्यकारों की काव्य रचनाओं से गूंजा निज निवास पकौड़ियां महादेव, दतिया

दतिया। सुप्रसिद्ध गीतकार स्वर्गीय श्री चंद्रशेखर मिश्र जी की जयंती के अवसर पर 18 अक्टूबर 2026, रविवार को उनके निज निवास पकौड़ियां महादेव, दतिया में सायं 7 बजे काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। साहित्य, संस्कृति और काव्य परंपरा को समर्पित इस आयोजन में नगर के साहित्यकारों, कवियों एवं गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता कर स्व. मिश्र जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण किया तथा उन्हें भावभीनी साहित्यिक श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी श्री अनिल तिवारी एवं विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध कहानीकार श्री राजनारायण बोहरे रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती एवं स्व. श्री चंद्रशेखर मिश्र जी के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात अतिथि देवो भव की भारतीय परंपरा का निर्वहन करते हुए स्व. मिश्र जी के सुपुत्र श्री ऋतुराज मिश्र, श्री ऋषि राज मिश्र, श्री ऋतुरंग मिश्र एवं श्री विनोद मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत-सम्मान किया।
साहित्यिक योगदान के लिए मनीराम शर्मा एवं महेश लाक्षाकार सम्मानित
समारोह का प्रमुख आकर्षण दतिया के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री मनीराम शर्मा एवं श्री महेश लाक्षाकार को ‘चंद्रशेखर मिश्र सम्मान’ प्रदान किया जाना रहा। इस सम्मान के माध्यम से साहित्य सृजन, काव्य साधना और साहित्यिक परंपरा के प्रति उनके योगदान का अभिनंदन किया गया। आयोजन ने स्व. मिश्र जी की स्मृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा साहित्यकारों के सम्मान की परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
साहित्य और संस्कृति को जीवंत रखने के लिए ऐसे आयोजन आवश्यक : अनिल तिवारी
मुख्य अतिथि श्री अनिल तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि दतिया की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए ऐसे साहित्यिक आयोजन करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को संवेदनशील बनाता है, विचारों को दिशा देता है और हमारी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने स्व. श्री चंद्रशेखर मिश्र जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सुपुत्रों द्वारा अपने पिता की स्मृति में इस प्रकार का साहित्यिक आयोजन करना उनके प्रति सच्चे सम्मान, श्रद्धा और आत्मीयता का परिचायक है। अपने पूर्वजों के साहित्यिक योगदान को याद करना और उनकी स्मृतियों को सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से जीवित रखना सराहनीय पहल है।
राजनारायण बोहरे ने किया स्व. मिश्र जी के साहित्यिक व्यक्तित्व का स्मरण
विशिष्ट अतिथि एवं प्रसिद्ध कहानीकार श्री राजनारायण बोहरे ने स्व. श्री चंद्रशेखर मिश्र जी के प्रति अपने विचार व्यक्त करते हुए उनके साहित्यिक व्यक्तित्व और रचनात्मक योगदान को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि साहित्यकार की पहचान उसकी रचनाओं में निहित संवेदनाओं, जीवन-दृष्टि और समाज से उसके जुड़ाव से होती है। गीत और कविता केवल भावों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज की स्मृतियों, अनुभवों और मानवीय मूल्यों को संरक्षित करने का सशक्त माध्यम हैं।
उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि परिवार द्वारा स्व. मिश्र जी की स्मृति को साहित्यिक आयोजन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसे प्रयास साहित्यकारों के प्रति सम्मान बढ़ाने के साथ-साथ साहित्यिक संवाद और रचनात्मकता को भी प्रोत्साहित करते हैं।
कवियों की रचनाओं ने बांधा समां
काव्य गोष्ठी में दतिया एवं आसपास के क्षेत्र के अनेक कवियों ने अपनी काव्य रचनाओं का पाठ किया। काव्य पाठ करने वाले रचनाकारों में श्री शैलेंद्र बुधौलिया, श्री रवि ठाकुर, श्री जगत शर्मा, श्री हरिकृष्ण हरि, श्री सुंदर लाल श्रीवास्तव, श्री अल्ताफ हुसैन, श्री नौशाद सोहेल, श्री बृजमोहन झा, श्री सिद्ध गुरु, श्री पूरण चंद शर्मा, श्री राज गोस्वामी एवं श्री कमलकांत शर्मा प्रमुख रूप से शामिल रहे।
कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन के विविध रंगों, सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और साहित्यिक भावभूमि को अभिव्यक्त किया। काव्य पाठ ने कार्यक्रम को भावपूर्ण एवं साहित्यिक गरिमा से परिपूर्ण बना दिया। उपस्थित श्रोताओं ने कवियों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और साहित्य के प्रति अपनी रुचि एवं जुड़ाव प्रदर्शित किया।
अनेक गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में विश्व रिकॉर्ड धारी श्री जितेंद्र गुरु, श्री शैलेंद्र खरे, श्री धर्मेंद्र अग्रवाल, श्री भगवान दास कुशवाहा, श्री के.के. गुप्ता सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं साहित्यप्रेमी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी ने स्व. श्री चंद्रशेखर मिश्र जी की स्मृति को नमन करते हुए साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्री रामभरोसे मिश्रा ने किया। उन्होंने अपनी प्रभावी संचालन शैली से कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को क्रमबद्ध रूप से आगे बढ़ाया तथा अतिथियों, सम्मानित साहित्यकारों और कवियों को मंच से जोड़ते हुए आयोजन को गरिमा प्रदान की।
अंत में श्री विनोद मिश्रा ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों एवं उपस्थित गणमान्य नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम में सहभागिता कर स्व. श्री चंद्रशेखर मिश्र जी की स्मृति को सम्मान देने के लिए सभी का धन्यवाद किया।

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