*दतिया आजकल तो आदमी के चरित्र में ,, देश,, को खोजना पढ रहा है, *

                खबर आपतक न्यूज़ इंडिया
       दतिया सह संपादक चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव
  ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव रिपोर्टर चेतन दास सुखानी

आजकल तो आदमी के चरित्र में ,, देश,, को खोजना पढ रहा है,,, देश प्रेम की भावना अतीत में समा चुकी है,,, बरिष्ठ कवि पंडित सुधाकर शर्मा जी,,  

उक्त गंभीर साहित्यिक टिप्पणी गत दिवस, पीताम्बरा पुरी स्थित गायत्री महिमा सभागृह में आयोजित,, राष्ट्र जागरण  मंच द्वारा आयोजित देश प्रेम की रचनाओं से ओत प्रोत गरिममय प्रबुद्ध जन संगोष्ठी में बालाघाट म, प्र  , ,, से पधारे सुप्रसिद्ध कवि,, लेखक, विचारक चिंतक पीताम्बरा माता के परम भक्त पंडित सुधाकर शर्मा जी ने बतोर मुख्य अतिथि अपने सारगर्भित उद्बोधन में कही,,, 
स़गोष्ठी की अध्यक्षता डा,, आर पी, गुप्ता जी ने की,,,, मुख्य अतिथि पंडित सुधाकर शर्मा जी,,, विशिष्ट अतिथि पूर्व संगठन मंत्री भा, ज, प,, पंडित उमाकांत भार्गव जी, पंडित रामरतन तिवारी जी,, पंडित शैलेंद्र बुधोलिया मंचासीन रहे,,,, 
सर्व प्रथम,, मंचस्थ अतिथियों द्वारा सरस्वती माता की मूर्ति पर माल्यपर्ण एवम दीप प्रज्वलित करके संगोष्ठी का शुभारंभ किया,,,, 

 सरस्वती वंदना,, बुंदेली कवि दादा संदरलाल ने  अपने मधुर कण्ठ से प्रस्तुत की ,,,, 
स्वागत उद्बोधन एवम राष्ट्र जगरण म़च की वर्तमान परिपेक्ष मे़ आवश्यकता पर सुप्रसिद्ध कवि ,,, राष्ट्र जागरण मंच के सचिव पंडित कमल कांत शर्मा जी विस्तार से प्रकाश डाला,,, राष्ट्र जागरण मंच के विस्तार एवम नव गठित कार्यकारणी की जानकारी प्रदान की,,,, 
नामचीन कवि,, जिनकी अब तक 22 कृतियां प्रकाशित होकर पाठकों को अभिप्रेरित कर रहीं हैं,,, डा, राज गोस्वामी जी ने अपनी बंदेली रचना के माध्यम से घटती राष्ट्र प्रेम की भावना पर चिंता व्यक्त की,, राज गोस्वामी जी की रचना को खूब पसंद किया गया,,, रामरतन शर्मा जी ने,, कहा कि सनातन  धर्म का क्षय होना,, ओर विधर्मियों का सर्वत्र बाहुल्य होना,,, राष्ट्र की एकता ओर अखण्डता के लिए घातक है,,,,मानस मयूर अनूप गोस्वामी जी ने कहा कि हमें राष्ट्र के लिए जीना और मरना चाहिए,,,, राष्ट्र ही सबसे बडा देवता होता है,,,   कवि सुघर सिंह रावत जी ने राष्ट्र प्रेम की भावना को जगाने वाली,,, ओज की कविता पढी,,,, जिसे श्रोताओं ने खूब पसंद किया,,,,, 
कवि शैलेंद्र बुधोलिया जी ने कहा कि आज साहित्य कारो़ं कवियों का यह युग धर्म बनता है कि वह, राष्ट्र प्रेम को जगाने वाला सृजन करें,,, पूर्व स़गठन मंत्री उमाकांत भार्गव जी ने राष्ट्र वाद का स्वरूप और वर्तमान संदर्भों मे़ राष्ट्र के प्रति हमारे कर्तव्यों और जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला,,,, 
कवि राजेन्द्र सिंह खे़गर जी ने ओज की कविता का पाठ किया ओर घटती राष्ट्र प्रेम की भावना पर अपनी चिंता ओर गहरी नाराजी व्यक्त की जिसे खूब पसन्द किया गया,,, पूर्व पुलिस अधीक्षक,, उपन्यास कार,,,कथा कार,,, लेखक,,, कवि,,, रामेश्वर दयाल खरे साहब ने,,, राष्ट्र जागरण मंच की नवीन कार्यकारणी की घोषणा की,,, प़डित ,,हरिहर समाधिया। 

Comments