सरस्वती विद्या मंदिर भरतगढ़ में मनाया गया गुरु पूर्णिमा उत्सव, सत्य के समान कोई दूसरा धर्म नहीं है- डॉ आर.पी.गुप्ता।
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प्रधान संपादक साहिल खान
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
रिपोर्टर रामलाल गौतम
दतिया सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भरतगढ़ में गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा मां सरस्वती जी के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर मां सरस्वती जी की वंदना से किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ आर.पी. गुप्ता जी (सेवानिवृत प्रधानाध्यापक संस्कृत महाविद्यालय ग्वालियर) एवं श्री मनोज जी गुप्ता प्राचार्य/ प्रबंधक (केशव बाल विकास समिति भरतगढ़)उपस्थित रहे अतिथि परिचय एवं कार्यक्रम की भूमिका श्री जगदीश कुशवाहा ने रखी तथा अतिथि स्वागत विद्यालय के भैया नमन सोनी, बहन प्रियांशी द्वारा किया गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ आर.पी.गुप्ता जी ने अपने उद्बोधन में गुरु शब्द का अर्थ बताते हुए गुरु के दो रूपों के बारे में बताया परोपकार को श्रेष्ठ बताते हुए द्रोणाचार्य ने कहा कि धन के सभी दास हैं लेकिन धन किसी का दास नहीं है इसीलिए गुरु ने शिक्षा दी है कि सभी व्यक्तियों को 16 संस्कारों से युक्त होना चाहिए तथा उन्होंने यही भी कहा कि हमारा पहला गुरु मां है और हर माता-पिता को 16 संस्कारों ज्ञान होना चाहिए तभी वह अपने बच्चों को इन संस्कारों के बारे में बता सकते है तथा दूसरा गुरु पिता है। बिना संस्कार के प्राणी पशु के समान है तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में कहा है कि सत्य के समान कोई दूसरा धर्म नहीं है तथा अंत में उन्होंने भैया बहिनों को संबोधित करते हुए संकल्प दिलाया कि हमें भारत को विश्व गुरु बनाना है। बहन निशि पाठक, नैंसी कुशवाहा, खुशी यादव द्वारा सामूहिक गीत की प्रस्तुति दी तथा बहन स्वाति विदुआ द्वारा एकल भजन प्रस्तुत किया गया कार्यक्रम का कुशल संचालन बहन राधिका श्रीवास्तव द्वारा किया गया। तथा अंत में श्रीमती कामिनी सिंह राठौड़ दीदी द्वारा अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया । कार्यक्रम को सफल बनाने में समस्त विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।
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