दतिया विधानसभा उपचुनाव अधिसूचना जारी होते ही राजनैतिक सरगर्मियां तेज*

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दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
रिपोर्टर चेतन दास सुखानी

दतिया*।मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राज राजनैतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 
मतदान 30 जुलाई को होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना होगी। भाजपा की ओर से पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और आजाद समाज पार्टी से दामोदर यादव प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। 
वहीं कांग्रेस में टिकट को लेकर अनेक नेताओं के बीच जोरदार दावेदारी चल रही है,एक दो दिन मे कांग्रेस उम्मीदवार का नाम फाइनल हो जायेगा।इसके उपरांत ही मुकाबला किस उम्मीदवार में होगा, यह स्पष्ट हो जाएगा।
जातीय समीकरणों की बात करें तो दतिया में OBC वर्ग के करीब 95 हजार मतदाता हैं, जो कुल वोटरों का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा हैं। इनमें यादव, कुशवाहा, लोधी, बघेल-पाल सहित अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
वहीं ब्राह्मण और जाटव-अहिरवार समाज के मतदाताओं की संख्या भी लगभग 33-33 हजार बताई जा रही है। भाजपा को परंपरागत रूप से ब्राह्मण मतदाताओं का समर्थन मिलता रहा है, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग, विशेषकर जाटव-अहिरवार समाज में कांग्रेस का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में इन दोनों वर्गों का रुख भी चुनाव की दिशा तय कर सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया सीट पर किसी एक जाति के भरोसे जीत आसान नहीं होगी। OBC, ब्राह्मण, जाटव, मुस्लिम और अन्य प्रभावशाली वर्गों का समर्थन जिस दल को मिलेगा, जीत की संभावना उसी के पक्ष में मजबूत होगी। ये
विगत वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में यह मुकाबला बेहद करीबी रहा था। भाजपा के डा.नरोत्तम मिश्रा को कांग्रेस के राजेन्द्र भारती ने पराजित किया था।
दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) घोटाले के मामले में दोषी करार देते हुए तिहाड़ जेल भेज दिया है। कोर्ट ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत दोषी पाया। करीब 25 साल पुराने घोटाले के इस मामले में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती और बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों को बैंक के साथ धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी पाया है।
*क्या था यह मामला*
दरअसल 24 अगस्त 1998 को राजेंद्र भारती की मां सावित्री श्याम ने जिला सहकारी ग्रामीण विकास बैंक, दतिया में 10 लाख रुपए की एफडी तीन वर्ष के लिए 13.50% वार्षिक ब्याज दर पर कराई थी। उस समय राजेंद्र भारती बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष भी थे और श्याम सुंदर श्याम जनसहयोग एवं सामुदायिक विकास संस्थान से भी जुड़े हुए थे। जिससे दोनों संस्थाओं में उनका प्रत्यक्ष हित जुड़ा हुआ था। अभियोजन के मुताबिक, राजेंद्र भारती ने अपनी पदीय स्थिति और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति के साथ मिलकर बैंक दस्तावेजों-लेजर बुक, एफडी स्लिप और रसीद-में काट-छांट कर एफडी की अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 10 और फिर 15 वर्ष कर दी। इसका उद्देश्य 13.50% ब्याज दर का लाभ लंबे समय तक अपनी मां और संबंधित संस्था को दिलाना था। जांच में सामने आया कि इस हेराफेरी के जरिए वर्ष 1999 से 2011 तक प्रतिवर्ष लगभग 1.35 लाख रुपए का अनुचित लाभ लिया गया, जिससे बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ। बाद में बैंक ऑडिट में अनियमितता उजागर हुई और संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाओं के निर्देश पर 29 जुलाई 2015 को मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इस केस में अदालत ने राजेंद्र भारती के खिलाफ IPC की धारा 420, 467, 468, 471 और 120(बी) के तहत आरोप तय किए थे, जबकि सह-आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति पर धारा 420, 467, 468, 471, 409 और 120(बी) के तहत मुकदमा चलाया गया। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को न्यायालय ने संदेह से परे प्रमाणित मानते हुए 2 अप्रैल 2026 को दोनों को दोषी करार दिया।
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