खबर आपतक न्यूज़ इंडिया
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
रिपोर्टर चेतन दास सुखानी
*संस्कार ही सच्ची शिक्षा : माधवेंद्र सिंह*
*माखन चोर से गीता उपदेशक तक बच्चों ने धारण किए श्रीकृष्ण के विविध स्वरूप, सरस्वती शिशु मंदिर में कृष्ण बाल स्वरूप सज्जा प्रतियोगिता संपन्न*
दतिया। सरस्वती शिशु मंदिर भरतगढ़ में विगत दिवस भव्य श्रीकृष्ण बाल स्वरूप सज्जा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में नन्हे-मुन्ने भैया-बहनों ने श्रीकृष्ण, सुदामा, यशोदा, बलराम एवं गीता उपदेशक सहित विभिन्न स्वरूप धारण कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। बच्चों के मनमोहक रूपों से विद्यालय परिसर ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो साक्षात वृंदावन धाम उतर आया हो।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारत स्काउट एंड गाइड जिला संघ के अध्यक्ष एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता माधवेंद्र सिंह परिहार उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केशव बाल विकास समिति के अध्यक्ष पंचम सिंह कौरव ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में पार्षद आकाश दुबे एवं होली मार्ट स्कूल के डायरेक्टर अनुभव राय उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि माधवेंद्र सिंह परिहार ने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर केवल किताबी ज्ञान नहीं देता, बल्कि संस्कारों का निर्माण करता है। आज जब कोई बच्चा श्रीकृष्ण का स्वरूप धारण करता है, तो वह केवल वेशभूषा नहीं अपनाता, बल्कि त्याग, प्रेम, मित्रता और निडरता जैसे गुणों को आत्मसात करने का संदेश देता है। यही विद्या भारती की सच्ची शिक्षा है।
उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चों को केवल कृष्ण के स्वरूप में सजाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके जीवन में श्रीकृष्ण के आदर्शों को भी उतारना आवश्यक है। बच्चों को सदाचार, बड़ों का सम्मान, सत्य बोलने और निडर रहने जैसे संस्कार घर के वातावरण से ही मिलते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे अपने माता-पिता के व्यवहार और गतिविधियों को बहुत जल्दी सीखते हैं, इसलिए घर का वातावरण शांत, संस्कारित और सकारात्मक होना चाहिए।
उन्होंने संगति के महत्व को समझाते हुए कहा कि आसमान से गिरी बूंद समुद्र में गिरकर खारी, नीम पर गिरकर कड़वी, मीठी जगह पर गिरकर मीठी और सीप में गिरकर मोती बन जाती है। बूंद वही रहती है, लेकिन संगति के अनुसार उसका स्वरूप बदल जाता है। इसलिए बच्चों को कुसंगति से बचाना बेहद आवश्यक है।
विशिष्ट अतिथि पार्षद आकाश दुबे एवं अनुभव राय ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग कार्यक्रम और कृष्ण सज्जा की सराहना करते हुए कहा कि शिशु मंदिर ऐसी संस्था है, जहां शिक्षा के साथ व्यक्ति निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
कार्यक्रम के अंत में संस्था के प्राचार्य कपिल तांबे ने सभी अतिथियों एवं अभिभावकों का आभार व्यक्त किया। प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र, मेडल एवं शील्ड प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चे एवं उनके परिवारजन उपस्थित रहे।
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