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जिला दतिया सह संपादक चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव
ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव रिपोर्टर चेतन दास सुखानी
सप्ताह में केवल मंगलवार को केंद्र खुलने का आरोप, कार्यकर्ता और सहायिका के ग्वालियर में रहने की शिकायत; कलेक्टर से जांच की मांग
दतिया। ग्राम पंचायत मर्सेनी खुर्द के अंतर्गत आने वाले ग्राम बसई मलिक में आंगनबाड़ी केंद्र के नियमित संचालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि केंद्र सप्ताह में केवल मंगलवार को ही खुलता है, जबकि अन्य दिनों में बंद रहता है। यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो यह बच्चों को मिलने वाली पोषण आहार और प्रारंभिक शिक्षा संबंधी सुविधाओं की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बच्चों को सुविधाएं मिलने पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, केंद्र में बच्चों को नियमित रूप से पोषण आहार नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसके अलावा बच्चों के मनोरंजन एवं शारीरिक विकास के लिए खेल सामग्री की उपलब्धता और पढ़ाई को रोचक बनाने वाली शैक्षणिक सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में यह जांच का विषय है कि केंद्र में निर्धारित व्यवस्थाओं का संचालन किस प्रकार किया जा रहा है और बच्चों को योजनाओं का लाभ नियमित रूप से मिल रहा है या नहीं।
कार्यकर्ता और सहायिका की उपस्थिति की जांच की मांग
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाया गया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका ग्वालियर में निवास करती हैं। इस शिकायत के मद्देनजर दोनों कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति, केंद्र के संचालन और विभागीय रिकॉर्ड का सत्यापन किए जाने की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
कलेक्टर से औचक निरीक्षण कराने की मांग
मामले को लेकर जिला प्रशासन से आंगनबाड़ी केंद्र का औचक निरीक्षण कराने की मांग की गई है। दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े से अपेक्षा की गई है कि वे संबंधित विभाग के अधिकारियों को जांच के निर्देश देकर केंद्र के नियमित संचालन, कर्मचारियों की उपस्थिति और पोषण आहार वितरण की स्थिति का सत्यापन कराएं। साथ ही खेल सामग्री एवं अन्य निर्धारित सुविधाओं की उपलब्धता की भी जांच की जाए।आंगनबाड़ी केंद्र छोटे बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में केंद्र के नियमित संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बच्चों के हितों को प्रभावित कर सकती है। अब देखना होगा कि शिकायत पर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की जाती है और जांच में वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।

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