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ब्यूरो सुनील नगेले शिवपुरी
आदिवासियों की झोपडी हटाने पहुंचा वन अमला : आदिवासियों को लाठियों से पीटा, पथराव भी हुआ, आदिवासियों ने फाड़ी बर्दी,महिलाओं सहित बच्चों को पीटा
शिवपुरी में वन भूमि पर झोपडी बनाकर रह रहे आदिवासियों की झोपडी को हटाने कोलारस पुलिस के साथ पहुंचे वनकर्मियों और आदिवासियों के बीच विवाद हो गया हैं। इस विवाद आदिवासियों पर लाठियां भांजी गई वहीँ आदिवासियों ने भी टीम पर पथराव कर दिया। इस झगड़े में आदिवासी महिला सहित उनके बच्चों को भी चोटें आई हैं। इस झगड़े के कुछ वीडियो भी सामने आये हैं। जिसमें पुलिस और वनकर्मी आदिवासियों में लाठी भांजते हुए नजर आ रहे हैं। वहीँ बच्चों को लाठी के बलबूते पर दौड़ाया जा रहा हैं। एक वीडियों में एक आदिवासी महिला हाथ में पत्थर लेकर वनकर्मियों से झगड़ती दिख रही हैं। घटना मंगलवार के दोपहर तीन बजे की हैं। इस झगड़े के बाद वन विभाग और आदिवासियों ने एक दूसरे की शिकायत कोलारस थाने में दर्ज कराई हैं।
वनभूमि से अतिक्रमण हटाने पुलिस बल के साथ पहुंचा था अमला -
कोलारस वन परिक्षेत्र के सनवारा बीट के कक्ष क्रमांक 128, 129 में वन विभाग द्वारा प्लांटेशन का कार्य किया जा रहा हैं। इस वन भूमि पर वर्षों से कुछ आदिवासी परिवार निवास करते हुए आ रहे हैं। मंगलवार को वन विभाग का उड़नदस्ता पुलिस व महिला वनकर्मी और कोलारस थाना पुलिस बल को लेकर सनवारा बीट क्षेत्र में पड़ने वाले मोरई गांव में झोपडी बनाकर रह रहे करीब 7 से 8 परिवारों को हटाने पहुंचा था। यहां झोपडी को हटाने को लेकर आदिवासियों में विवाद हो गया।
गिरेवान पकड़कर बर्दी फाडने का आरोप -
कार्यवाहक वनपाल गिरीश नामदेव का कहना हैं कि जिस स्थान पर आदिवासी रह रहे थे। वह निर्माणाधीन वृक्षारोपण की जमीन थी। वृक्षारोपण के विस्तार के लिए आदिवासियों की झोपडी हटाने के निर्देश मिले थे। टीम मौके पर पहुंची हुई थी। लेकिन आदिवासी परिवार झोपडी हटाने के नाम भड़क गए। इस दौरान आदिवासी मारपीट पर उतारू हो गए थे उनके द्वारा मेरी गिरेवान पकड़कर बर्दी फाड़ दी थी। आदिवासियों ने वन अमले पर पथराव भी किया था। इस पथराव में बीट गार्ड रामचरण केवट, दिनेश सहरिया में घायल हुए।
महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट का आरोप -
मंगलवार की शाम मोरई के आदिवासियों ने कोलारस थाना में पहुंचकर उनके साथ हुई मारपीट की शिकायत दर्ज कराई हैं। आदिवासी महिलाओं का कहना था कि वनकर्मियों सहित पुलिसकर्मियों ने मिलकर महिलाओं और बच्चों के साथ बेरहमी से मारपीट की हैं। कृष्णा आदिवासी ने बताया कि मौके पर वन अमला झोपडी हटाने पहुंचा था। सभी आदिवासी परिवार जगह खाली करने को तैयार थे।
उनसे झोपडी अपने हाथों से हटाने के लिए थोड़ा समय माँगा गया था। जिससे वह अपने सामान सहित झोपडी के सामन को दूसरी जगह ले जा सके। लेकिन वनकर्मी झोपडी तोड़ने पर आमादा थे। उसने वन विभाग के बड़े बाबू को झोपडी तोड़ने के लिए मना किया था। लेकिन बड़े बाबू मेरे बाल पकड़कर लात मार दी। जिससे उसका एक हाथ टूट गया था। बाद वनकर्मियों ने लाठियों से हमला बोल दिया सभी आदिवासी परिवारों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। अमला इतने पर भी नहीं रुका, उनके द्वारा बच्चों पर भी हमला लाठियों से हमला बोला गया, उन्हें दौड़ाकर खदेड़ा गया। जिससे उनके बच्चों में दहशत हैं।
दबंग जोत रहे हैं वनभूमि -
मोरई के आदिवासियों का कहना था कि क्षेत्र में सैकड़ों बीघा जंगल की जमीन पर दबंग अतिक्रमण कर उसे जोत रहे हैं। कुछ माह जिस जमीन पर आदिवासी परिवार थोड़ी बहुत फसल कर परिवार पालते थे। उस जमीन को क्षेत्रीय दबंगों के कहने पर खाली करा लिया गया। तबसे झोपडी बनाकर मजदूरी कर जैसे तैसे अपना पेट पाल रहे थे। लेकिन वन विभाग ने झोपड़ियों को तोड़कर उन्हें बेघर कर दिया। उन्हें आवास योजना का लाभ तक नहीं मिला हैं।


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