दतिया नवागत पुलिस अधीक्षक की ये रहेंगी चुनौतियां।

KHABAR AAPTAK (NEWS INDIA)
       प्रधान संपादक साहिल खान 
      दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव 
          रिपोर्टर रामलाल गौतम 

दतिया _: नवागत पुलिस अधीक्षक सूरज वर्मा ने संभाला पदभार। ये रहेंगी चुनौतियां (1) दतिया में जुआ का खेल पुलिस के लिए उद्योग बन गया है, ऐसे में अपनों से ही चुनौती मिलेगी। (2) वर्षों से जमे थाना प्रभारी भी चुनौती रहेंगे। (3) राजनैतिक दवाब हावी रहेगा। कहा जाए तो कांटों से भरा ताज है दतिया SP की कुर्सी।



कलेक्‍टर सभाकक्ष में बाढ़ आपदा प्रबंधन की बैठक।

 दतिया:प्रभारी कलेक्‍टर श्री अक्षय कुमार तेम्रवाल की अध्‍यक्षता में आज बाढ़ आपदा प्रबंधन की बैठक सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में जिले में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के संबंध में चर्चा कर मानसून के पूर्व सभी आवश्‍यक तैयारियां सुनिश्‍चित करने के आवश्‍यक दिशा निर्देश दिए। बैठक में अपर कलेक्टर श्री महेन्द्र सिंह कवचे,एसडीएम दतिया ,सेवढा़,भाण्डेर,संयुक्त कलेक्टर श्री ऋषि कुमार सिंघई, डिप्टी कलेक्टर श्री भरत कुमार सहित अन्य अधिकारीगण उपिस्थत रहे।



     दर्शन की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं हैं।

 दतिया:डॉ विद्यासागर उपाध्याय ने कहा कि दर्शन का शाब्दिक अर्थ है दृष्टि।प्रत्येक व्यक्ति की अपनी अलग-अलग दृष्टि और दृष्टिकोण होता है।यही कारण है कि दर्शन की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं हैं।भारतीय दर्शन का प्रतिपाद्य है आत्मतत्व का ज्ञान।जब समस्त संसार भौतिक जिज्ञासा में पागल हो रहा था तब भारतीय ऋषियों ने कहा अथातो ब्रह्म जिज्ञासा।आओ जाने कि समस्त सृष्टि का मूल कारण वह ब्रह्म कौन है ? कैसा है ?ब्रह्म और जीव क्या एक ही है कि दो हैं? सबसे बड़ा प्रश्न है कि मैं कौन हूं।हाथ मेरा है परन्तु हाथ मैं नहीं हूं।घड़ी मेरी है लेकिन मैं घड़ी नहीं हूं ।मै पिता के पास जाता हूं तो पुत्र हो जाता हूं। उसी समय अपने पुत्र के सामने पिता हो जाता हूं।शिष्य के सामने गुरु और गुरु के सामने शिष्य हो जाता हूं,आखिर मैं कौन हूं। इस प्रश्न का समाधान प्रस्थानत्रयी से होता है। पूर्वाग्रह के बावजूद शापेनहावर को स्वीकार करना पड़ा कि बृहदारण्यक उपनिषद् की तीन पंक्तियां दुनियां बदल सकती हैं।असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । कृति है तो कृतिकार अवश्य है इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए यही सत है,यही ईश्वरीय वाणी वेद का कथन है।यही कारण है कि श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान को उद्घोष करना पड़ा - नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः । उभयोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्त्वदर्शिभि

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