योग थेरेपी में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. अनिल कुमार दुबे ‘योग भूषण’ को मिला सम्मान।

KHABAR AAPTAK NEWS INDIA 
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव 
रिपोर्टर चेतन दास सुखानी 

योग थेरेपी में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. अनिल कुमार दुबे ‘योग भूषण’ को मिला सम्मान* 

वर्ल्ड कल्चर एंड एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन कमिशन द्वारा पूरे भारत से एकमात्र चयन*

 दतिया योग एवं शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने वाले मध्यप्रदेश के दतिया* जिले के *गौरव डॉ. अनिल कुमार दुबे ‘योग भूषण’ को वर्ल्ड कल्चर एंड एनवायरमेंटल* प्रोटेक्शन कमिशन द्वारा Honorary डॉक्टरेट इन योगा थेरेपी प्रदान किया गया। *यह सम्मान उनके लंबे समय से योग थेरेपी, शोध कार्य, सामाजिक सेवा,* तथा एक आदर्श वक्ता के रूप में किए गए उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया। संपूर्ण *भारतवर्ष से इस विशिष्ट सम्मान के लिए एकमात्र चयन डॉ. दुबे का होना, दतिया* सहित पूरे प्रदेश के लिए गौरव की *बात है।40 वर्षों की अनवरत सेवा, शिक्षा और योग को समर्पित जीवन"डॉ. अनिल कुमार दुबे वर्तमान में* प्राचार्य (H.S. Samvarg) जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण *संस्थान महाविद्यालय दतिया के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने 40 वर्षों के दीर्घ शैक्षणिक जीवन में हजारों* विद्यार्थियों और करीब 1500 शिक्षकों को दिशा दी है।डॉ. *दुबे के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक तथा आत्मिक विकास की* दिशा में मजबूत आधार मिला। वे सदैव अच्छे विचार, श्रेष्ठ चिंतन, उत्तम संस्कार और *उत्कृष्ट चरित्र निर्माण पर बल देते रहे।अद्वितीय शैक्षणिक योग्यता और शोध कार्य,डॉ. दुबे की विशिष्ट* शैक्षणिक उपलब्धियाँ उन्हें अलग पहचान दिलाती हैं"एम.एस-सी (वनस्पति शास्त्र)" *गोल्ड मेडलिस्ट, बी.एड"गोल्ड मेडलिस्ट,एम.एड"प्रथम* स्थान"पीएचडी (योग एजुकेशन)"डि.लिट,योग थेरेपी और योग *शिक्षा में उनके अद्वितीय शोध कार्यों ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय* स्तर पर पहचान दिलाई है।योग क्षेत्र में अप्रतिम योगदान  45 से अधिक पुस्तकें *प्रकाशित,योग के क्षेत्र में डॉ. दुबे अब तक लगभग 45 पुस्तकें लिख चुके हैं,* जो विद्यार्थियों, शिक्षकों और योग साधकों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई हैं। *वे दतिया एवं ग्वालियर जिले में जिला योग प्रभारी के रूप में भी* अपनी प्रभावी सेवाएँ दे चुके हैं। कोरोना काल में मानवता की अनोखी सेवा, *कोविड-19 महामारी के कठिन समय में डॉ. दुबे ने “योग से निरोग” अभियान* प्रारंभ कर क्वारेंटाइन सेंटरों में संक्रमित एवं संदिग्ध मरीजों को योगाभ्यास *और प्राणायाम करवाए।उनके इस प्रयास से अनेक लोगों को अस्पताल* जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी और उनकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हुई।इस मानवीय सेवा की सराहना *पूरे प्रदेश में की गई और तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा भी उन्हें विशेष रूप से सराहा* गया,सम्मान और उपलब्धियाँ,उनके उल्लेखनीय योगदान के *लिए डॉ. दुबे को अब तक कई महत्वपूर्ण सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका* है,राज्यपाल सम्मान,योग भूषण सम्मान,योग  सम्मान, *संदीपनी ऋषि सम्मान,विद्या रत्न सम्मान,उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान,इसके* अलावा उन्हें जिला, राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं,समाज के लिए *प्रेरणास्रोत,डॉ. अनिल कुमार दुबे का जीवन शिक्षा, योग और समाज सेवा का* अद्वितीय उदाहरण है। वर्ल्ड कल्चर एंड एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन *कमिशन द्वारा उन्हें मिला यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मान न केवल दतिया बल्कि पूरे* मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है।उनकी उपलब्धियाँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं *और योग की महत्ता को विश्व पटल पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण* योगदान देती हैंदतिया ने आज एक बार फिर गर्व से सिर ऊँचा किया है, *और इस गौरव का श्रेय जाता है"डॉ. अनिल कुमार दुबे ‘योग भूषण’ को।

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