जातिवाद आतंकवाद से भी खतरनाक है :- शंकराचार्य जी

KHABAR AAPTAK NEWS INDIA
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
रिपोर्टर चेतन दास सुखानी

कल दिनांक 11 जनवरी 2026 रविवार को हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति द्वारा दतिया नगर में तीन स्थानों पर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया । जिसमें अपने-अपने बस्ती मोहल्लों में कलश यात्रा एवं शोभा यात्रा का आयोजन किया गया कार्यक्रम के प्रारंभ में तुलसी माता का पूजन एवं गौ माता का पूजन किया गया महापुरुषों के चित्रों की प्रदर्शनियां लगाई गई भजन मंडली द्वारा भजनों का आयोजन किया गया कार्यक्रम में महिलाएं पुरुष बच्चे सभी बंधु सा परिवार सम्मिलित हुए 
पहला कार्यक्रम राम जी वाटिका में हुआ जिसमें अपने उद्बबोधन में शंकराचार्य श्री प्रज्ञानंद जी महाराज ने कहा कि क हमारी पृथ्वी माता और भारत माता की सेवा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता लगे हुए हैं भारत धर्मप्राण देश है धर्म भारत की आत्मा है भारत का मूल धर्म है समस्त सृष्टि का धर्म है संपूर्ण विश्व भारत का स्वरूप है भारत भूमि भगवान का हृदय है विश्व को सुरक्षित करने परमात्मा रस रूप है‌हम उस परमात्मा के स्वरूप है जीव और परमात्मा एक ही है परमात्मा का स्वरुप सृष्टि है हम सब में वह परमात्मा का अंश है नाम से तो रूप का बोध होता है हम परमात्मा के मूर्त रूप हैं समरसता के रूप में हम हैं समाज में जाति केवल पहचान है और जातिवाद आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक है दिन ही समाज को जाति में बताकर सट्टा का लाभ ले रहे हैं राम राज्य की स्थापना ऐसे ही नहीं है सनातन धर्म सदा से था है और सदा रहेगा सनातन धर्मियों की चिंता करना है संपूर्ण विश्व को एक कुटुंब मानता है उसमें सभी को सुखी रहने की कल्पना करता है हम तो सभी सनातन हिंदू राष्ट्र की कामना इसलिए करते हैं की विश्व में शांति हो हम तो विश्व कल्याण की कामना करते हैं भगवान तो आतंकवादियों का संहार करने के लिए आते हैं हम वासना की संतान नहीं है हमारा आदर्श राम राज्य है राम राज्य में एक घाट पर राजा और सामान्य नागरिक एक घाट पर स्नान करता था वही हमारा रामराज्य है इससे अधिक समरसता और क्या हो सकती है आज की आवश्यकता है कि हम अपनी संस्कृति परंपरा को ना भूले वेद की आज्ञा में रहना ही सनातनी हिंदू है और आप सब समरसता मूलक रहकर प्रकृति को बचाएं। 
मुख्य वक्ता के रूप में यशवंत जी इंदरपुरकर (क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य क्षेत्र) ने अपने उद्बबोधन में कहा कि भारत में हिंदू होना सौभाग्य की बात है सर्वे संतु निरामया हिंदू का धर्म किसी का बुरा सोचना नहीं है संघ के 100 वर्ष पूरे होने का निमित्त है संतों की बात रखना हिंदू समाज के सामने चुनौतियां हैं देखने में हम सुखी हैं आज हम सम्मान के साथ जी रहे हैं हमारा प्रधानमंत्री है मुख्यमंत्री है संघ की स्थापना के समय हम अधीन थे संघ के डॉक्टर हेडगेवार जी क्रांतिकारी कार्यकर्ता थे किंतु उन्होंने सोचा कि हमारे समाज पर दूसरे के पराधीन है जबकि हम सब तरह से संपन्न थे फिर हम क्यों पराधीन हो गए रात में शादी इसलिए होती हैं क्योंकि बहू बेटियों को लोग उठा ना ले जाएं हिंदू समाज जब खड़ा हुआ तो देश स्वतंत्र हुआ आज राम मंदिर बन गया हिंदू समाज संगठित हुआ तो सब हो गया समाज की एक जुट का सम्मेलन है यह हिंदू सम्मेलन हिंदू समाज को संगठित करने का कार्य है संघ आज भी कर रहा है हिंदू समाज को संगठित करने का कार्य बस्ती नगर में हो रहे सम्मेलनों से हो रहा है हम अपने आप को पहचाने हम अपनी संस्कृति के अनुसार रहे गुलामी से बाहर निकले जाति भेद समाप्त करें हम अपना घर परिवार कुटुंब को संभाले और पर्यावरण बचाना है जल बचाना है हमें नागरिक कर्तव्यों का पालन करना है 

दूसरा कार्यक्रम रतन वाटिका में हुआ जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुरैना विभाग के विभाग प्रचारक धनराज जी ने कहा कि स्वतंत्र देश में राष्ट्रभक्ति क्या है स्वतंत्र देश में राष्ट्रभक्ति वह है जहां पर नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं स्वतंत्र देश में नागरिक कर्तव्यों का पालन ही सबसे बड़ी राष्ट्रभक्ति है इसलिए राष्ट्रभक्ति का परिचय हमें देना पड़ेगा आज हिंदू को डरने की आवश्यकता नहीं है आज हिंदू को विचलित होने की आवश्यकता नहीं है जातियों के नाम पर बताने और भ्रम फैलाकर लड़ने की आवश्यकता नहीं है आज हिंदू को हिंदू होने के नाते एक साथ खड़े होने की आवश्यकता है।
तीसरा कार्यक्रम संत हजारी राम मंदिर गाड़ी खाना में हुआ जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में शिव शंकर जी (प्रांत समरसता प्रमुख मध्य भारत प्रांत) ने अपने उद्बबोधन में कहा संघ शताब्दी वर्ष में 80000 की संख्या में हिंदू सम्मेलन हो रहे हैं चीन में लाखों की संख्या में हिंदू समाज एकत्रित हो रहा है इस देश का प्रत्येक हिंदू मेरा भाई है इस छोटे स्तर पर बस्ती स्तर पर हम पहली बार एकत्रित हुए हैं जब-जब हम हिंदुत्व का भाव भूले तब तब इस देश पर विपत्ति आई 500 वर्षों बाद भगवान राम का मंदिर इसलिए बन पाया क्योंकि हिंदू एकत्रित हुआ है वह मंदिर हमारा है सनातन का मंदिर है भगवान शिव के परिवार पर विचार करें स्वयं नाग गले में है नंदी की सवारी मैया का वाहन शहर है गणेश का वहां चूहा है सभी का सामान्य देखने लायक है हिंदू समर्थ साली होने के बाद भी सहनशील होता है 
शताब्दी वर्ष में चल रहे पांचो पंच परिवर्तन के विषय सामाजिक समरसता के बारे में उन्होंने बताया कि देश को जातिवाद और छुआछूत से बहुत हानि हुई है इसी ने हमको गुलाम बनाया समरसता हमारे घर से शुरू होना चाहिए 
कुटुंब प्रबोधन के बारे में उन्होंने बताया कि हम अपने परिवार के साथ बैठकर मंगल गीत भजन करें कुटुंब प्रबोधन में माता बहनों का ज्यादा कार्य है संस्कार देने वाले हम परिवार जन ही हैं संस्कार परिवार का कवच बनता है भारत को जानने के लिए भ्रमण जरूरी है 
पर्यावरण के बारे में उन्होंने बताया कि पर्यावरण हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है बच्चों के जन्मदिन पर पेड़ लगाना चाहिए सिंगल उसे पॉलिथीन का प्रयोग नहीं करना चाहिए शादी विवाह में डिस्पोजल गिलास का उपयोग नहीं करना और पानी बचाना है 
सुबह का भाव में हमें अपने आप पर स्वाभिमान होना चाहिए हस्ताक्षर हिंदी में करना चाहिए लेकिन 100 का भाव इन छोटे-छोटे कार्यों से आता है नागरिक कर्तव्य सभी संवैधानिक व्यवस्थाओं का पालन सभी को करना चाहिए। 
तीनों स्थानों पर भारत माता की आरती की गई और कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों लोगों ने भोजन प्रसादी ग्रहण की, 

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