दतिया बुंदेलखंड क्षेत्र के मत्स्य पालकों हेतु आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन।

KHABAR AAPTAK NEWS INDIA
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
रिपोर्टर चेतन दास सुखानी

दतिया बुंदेलखंड क्षेत्र के मत्स्य पालकों हेतु आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन, 


दतिया मात्स्यिकी महाविद्यालय, दतिया (रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय) में “बुंदेलखंड क्षेत्र में कार्प मछली पालन” विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में मत्स्य पालन को वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अधिक लाभकारी, टिकाऊ तथा रोजगारपरक बनाना था। यह कार्यक्रम भा.कृ.अनु.प. – राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो  द्वारा अनुसूचित जाति योजना  के अंतर्गत वित्तपोषित था। प्रशिक्षण में बुंदेलखंड क्षेत्र के विभिन्न जिलों से आए मत्स्य पालकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का आयोजन माननीय कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह के कुशल मार्गदर्शन एवं संरक्षण में संपन्न हुआ। आयोजन समिति ने उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व एवं प्रेरणा से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया जा सका। साथ ही डॉ. काजल चक्रवर्ती (निदेशक, भा.कृ.अनु.प. – राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो ) एवं डॉ. पूनम जयंत सिंह (नोडल अधिकारी, भा.कृ.अनु.प. – राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो ) का विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया गया, जिनके सहयोग एवं वित्तपोषण से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक अमली जामा पहनाया जा सका। कार्यक्रम के प्रशिक्षण सलाहकार एवं अधिष्ठाता, मात्स्यिकी महाविद्यालय, डॉ. प्रमोद कुमार पाण्डेय के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की गई, जिन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए आवश्यक मंच, संसाधन एवं सुविधाएं उपलब्ध कराईं। समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, एक्वाकल्चर विभाग रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आधुनिक एवं वैज्ञानिक मत्स्य पालन तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन एवं बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, संतुलित आहार, तालाब एवं जल गुणवत्ता प्रबंधन तथा नवीन तकनीकों के उपयोग पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को कार्प मछली पालन की वैज्ञानिक विधियों, तालाब निर्माण, जल गुणवत्ता प्रबंधन, बीज चयन, पोषण एवं आहार प्रबंधन, रोग नियंत्रण तथा विपणन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त विशेषज्ञ वक्ताओं एवं वैज्ञानिकों द्वारा मछली पालन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग जैसे आधुनिक विषयों पर भी व्याख्यान दिए गए। व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया, जिससे वे अपने क्षेत्र में इन तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर सकें। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. नीलेश कुमार, डॉ. विकास साहू एवं सभी सह-समन्वयकों ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन समिति ने उनकी मेहनत एवं समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने दिन-रात कार्य कर प्रशिक्षण की समस्त व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित बनाए रखा। मंच संचालन डॉ. गिरिजा सौरभ बेहरे द्वारा किया गया। प्रशिक्षणार्थियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना करते हुए यह विश्वास व्यक्त किया गया कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान एवं तकनीकों का उपयोग कर वे बुंदेलखंड क्षेत्र में मत्स्य पालन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेंगे तथा क्षेत्र में रोजगार एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगे।

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