दतिया भू-माफियाओं का 'सस्ता' शिकार: दतिया के बसई में ₹3,500 में बिकी आदिवासी मां की 2 एकड़ जमीन, रक्षक बनी सरकार सोती रही!
KHABAR AAPTAK NEWS INDIA
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
रिपोर्टर चेतन दास सुखानी
दतिया (बसई क्षेत्र): मध्य प्रदेश में आदिवासियों के 'सम्मान और अधिकार' के सरकारी विज्ञापनों की धज्जियां उड़ाने वाली एक दिल दहला देने वाली तस्वीर दतिया के बसई क्षेत्र से सामने आई है। यहाँ एक असहाय, अनपढ़ और गरीब आदिवासी बुजुर्ग मां की दो एकड़ पुश्तैनी ज़मीन को भू-माफियाओं ने महज़ ₹3,500 की कौड़ियों जैसी कीमत देकर धोखाधड़ी से हड़प लिया। उप-चुनाव के प्रचार में बसई पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के सामने जब इस बूढ़ी मां ने रो-रोकर अपने आंसुओं से शोषण की पूरी गाथा सुनाई, तो वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई।
सरकारी सिस्टम की नाक के नीचे सबसे बड़ा 'लैंड स्कैम'यह महज़ एक जमीन की धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की अंधी और बहरी हो चुकी व्यवस्था का जीता-जागता सबूत है। सवाल उठना लाजिमी है:कहाँ था राजस्व विभाग? दो एकड़ कीमती ज़मीन का सौदा सिर्फ ₹3,500 में हो गया, और सरकारी रजिस्ट्री दफ्तर, पटवारी और स्थानीय प्रशासन ने आँखें मूंद लीं? बिना किसी सांठगांठ या घूसखोरी के ऐसा फर्जीवाड़ा मुमकिन ही नहीं है।मूकदर्शक बनी मोहन यादव सरकार: शिवराज सिंह चौहान के बाद 'मोहन यादव सरकार' के राज में आदिवासियों पर अत्याचारों का ग्राफ घटने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। आदिवासियों को जल, जंगल, ज़मीन का हक देने का दावा करने वाली भाजपा सरकार में आज गरीब आदिवासी अपनी ही ज़मीन से बेदखल किए जा रहे हैं।जीतू पटवारी का तीखा हमला: "पूरा प्रदेश देख रहा है यह अत्याचार"बुजुर्ग महिला की आपबीती सुनने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि, "आज पूरा मध्य प्रदेश देख रहा है कि किस तरह मोहन यादव सरकार आदिवासियों की ज़मीन, सम्मान और अधिकारों पर लगातार हमले कर रही है।" उन्होंने साफ किया कि भाजपा सरकार में भू-माफियाओं को खुला संरक्षण मिला हुआ है और वे बेखौफ होकर सबसे कमजोर वर्ग को निशाना बना रहे हैं।मुख्य राजनैतिक और प्रशासनिक सवाल जो सरकार को कटघरे में खड़े करते हैं:गरीबों की सुरक्षा का दावा कहाँ है?
लाडली बहना और आदिवासी कल्याण की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली सरकार बसई की इस बेबस माँ को सुरक्षा क्यों नहीं दे पाई?क्या दोषियों पर चलेगा बुल्डोजर? विपक्ष और जनता अब मुख्यमंत्री से पूछ रही है कि क्या इन भू-माफियाओं के अवैध साम्राज्य पर सरकार का बुल्डोजर चलेगा या फिर इन्हें भी राजनैतिक संरक्षण देकर बचा लिया जाएगा?ज़मीन की वापसी कब? पीड़ित परिवार दर-दर की ठोकरें खा रहा है। प्रशासन कागजी कार्रवाई की बात कर रहा है, लेकिन वास्तविक रूप से इस गरीब आदिवासी माँ को उसकी पैतृक ज़मीन वापस दिलाने के लिए तत्काल क्या कदम उठाए जा रहे हैं?निष्कर्ष: दतिया के बसई क्षेत्र की यह घटना भाजपा सरकार के आदिवासी-हितैषी होने के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। चुनाव के इस दौर में यह मुद्दा केवल दतिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में यह पूरे प्रदेश में आदिवासियों की सुरक्षा और अस्मिता की लड़ाई का सबसे बड़ा हथियार बनने जा रहा है

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