दतिया शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दतिया में गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा पर्व का आयोजन किया जा रहा है

KHABAR AAPTAK NEWS INDIA दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव रिपोर्टर चेतन दास सुखानी
दतिया शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दतिया में गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा पर्व का आयोजन किया जा रहा है ध्यान से एकाग्रता, स्मृति एवं शैक्षिक उपलब्धि में असीमित वृद्धि होती है - प्राचार्य डॉक्टर डॉ अनिल कुमार दुबे ने शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दतिया में गुरु पूर्णिमा पखवाड़े के अवसर पर विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि गुरुजन सदैव पूजनीय है, वंदनीय हैं। गुरु ही हमें 'गु' (अज्ञान के अंधकार) से 'रु' (ज्ञान-विज्ञान की रश्मि/प्रकाश) की ओर ले जाते हैं। गुरु पूर्णिमा अपने गुरुजनों की सेवा, वंदना और उनका शुभाशीष पाने का प्रमुख उत्सव है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 2020 के उद्देश्यों को बढ़ावा देते हुए पुरातन भारतीय ज्ञान परम्परा तथा भारतीय गुरु-शिष्य परम्परा के आदर्शों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। डॉ. दुबे ने बताया कि विद्यालय में गुरु पूर्णिमा पखवाड़े के अंतर्गत 'महर्षि सांदीपनि श्रृद्धा पर्व' का खेल, नाटक, चित्रकला, संगीत एवं योग ध्यान आदि कार्यक्रमों का आयोजन कराया, गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा चल रहा है। महर्षि सांदीपनि योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के गुरु थे। उन्होंने तत्समय अमीर और गरीब सभी छात्रों को पढ़ाकर राष्ट्र भक्ति का परिचय दिया। वहीं देश में गुरुकुल शिक्षा पद्धति को व्यवस्थित करने में प्रभावी योगदान दिया। शिक्षकों को निर्देशित किया कि महर्षि सांदीपनि के जीवन चरित्र एवं गुरुकुल शिक्षा पद्धति के प्रसार में उनके वैशिष्ट्य और योगदान पर केंद्रित भाषण प्रतियोगिता आयोजित करवाई गई एवं गुरू पूजन आयोजन किया जायगा l जिससे विद्यार्थियों और युवाओं में अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति आस्था सुदृढ़ हो। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा को सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक ताकि गुरु-शिष्य परम्परा का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रभावी ढंग से पहुंचे l ध्यान एवं योगाभ्यास करते हुए डॉ दुबे ने कहा कि योग हमारे जीवन में योग महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता हैl योग समग्र जीवन पद्धति हैl अष्टांग योग हमें जीवन जीना सिखाता हैl अष्टांग योग में यम,नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान,समाधि जिसमें ध्यान सबसे महत्वपूर्ण हैl ध्यान के अभ्यास से एकाग्रता विकसित होकर, विद्यार्थियों की स्मृति और शैक्षिक उपलब्धि को बढ़ता हैl इस अवसर पर डॉक्टर दुबे के द्वारा ध्यान के आसन आसन सुखासन, पद्मासन,सिद्ध आसान, स्वास्तिक आसानव,का अभ्यास कराया और खड़े होकर किए जाने वाले आसन बैठकर किए जाने वाले आसन, पेट के बल, पीठ के बल किए जाने वाले आसनों के बारे में बताय ध्यान के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करते हुए विभिन्न प्रकार के ध्यान का अभ्यास कराया और उनके लाभ बताए l इस अवसर पर विद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्य श्रीमती यामिनी कोहली, रूपल गोबरेले,शबनम प्रजापति, रोहिणी कोहली,रश्मि गुर्जर, नरेंद्र शर्मा, रामेश्वर जाटव, संगीता गुप्ता, आराधना श्रीवास्तव, रश्मि गुप्ता स्टाफ एवं मुख्य रूप से 300 से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहेl

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