उल्लास नव साक्षरता कार्यक्रम के तहत नव साक्षर परीक्षा आयोजित, 13 महिला-पुरुषों ने लिया भाग*

          खबर आपतक न्यूज़ इंडिया
    दतिया सह संपादक चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव
ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव रिपोर्टर चेतन दास सुखानी

उल्लास नव साक्षरता कार्यक्रम के तहत नव साक्षर परीक्षा आयोजित, 13 महिला-पुरुषों ने लिया भाग*

शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती, शिक्षित होकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ें : जितेंद्र सिंह तोमर*
शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें और जीवन को सफल बनाएं : आशुतोष श्रीवास्तव*

 दतिया जिले में उल्लास नव साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देने और असाक्षर महिला-पुरुषों को शिक्षा* की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से शासकीय माध्यमिक *विद्यालय क्रमांक -2, पीतांबरा पीठ दतिया में नव साक्षर परीक्षा का आयोजन किया गया। इस परीक्षा में 13 महिला* एवं पुरुष नव साक्षरों ने उत्साहपूर्वक_ भागीदारी करते हुए अपनी शैक्षणिक योग्यता का प्रदर्शन किया। परीक्षा के *माध्यम से नव साक्षरों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने के साथ ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का* संदेश दिया गया।परीक्षा के उपरांत जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी *जितेंद्र सिंह तोमर, बीआरसी आशुतोष श्रीवास्तव, जिला सह-समन्वयक सत्येंद्र तोमर, संकुल केंद्र सिविल लाइन के शहर समन्वयक वीरेंद्र कुमार* सिंह, जन शिक्षक एमपी सिंह बघेल एवं अवधेश मिश्रा तथा विद्यालय की प्रधानाध्यापिका आकांक्षा रावत ने *परीक्षा में शामिल हुए प्रौढ़महिला-पुरुषों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को सम्मानित कर* उनके प्रयासों की सराहना की गई।
शिक्षा से जीवन में आते हैं सकारात्मक बदलाव : जितेंद्र सिंह तोमर *कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी जितेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि शिक्षा का व्यक्ति के जीवन में अत्यंत* महत्वपूर्ण योगदान होता है। शिक्षा केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को जागरूक बनाती है और उसे जीवन में सही *निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है।उन्होंने कहा कि शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती। व्यक्ति किसी भी उम्र में शिक्षा ग्रहण कर सकता है* और अपने जीवन को नई दिशा दे सकता है। नव साक्षर महिला एवं पुरुषों को चाहिए कि वे शिक्षा के महत्व को समझें तथा *पढ़ना-लिखना सीखकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ें तोमर ने कहा कि शिक्षित व्यक्ति अपने दैनिक जीवन के कार्यों* को अधिक सरलता से कर सकता है। शिक्षा से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के *प्रति जागरूक होता है। उन्होंने परीक्षा में शामिल सभी नव साक्षरों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे शिक्षा प्राप्त करने* की इस प्रक्रिया को निरंतर जारी रखें तथा अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी शिक्षा के प्रति जागरूक करें। *उन्होंने कहा कि उल्लास नव साक्षरता कार्यक्रम का उद्देश्य केवल निरक्षर व्यक्तियों को अक्षर ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि उन्हें जीवनोपयोगी* शिक्षा से जोड़ना भी है, ताकि वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें शिक्षित होकर अधिकारों के प्रति जागरूक *बनें : आशुतोष श्रीवास्तव इस अवसर पर बीआरसी आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के विकास का महत्वपूर्ण आधार है। शिक्षित होने से व्यक्ति* अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनता है और समाज में अपनी भूमिका को बेहतर तरीके से समझ पाता है। *उन्होंने कहा कि पढ़ना-लिखना सीखने से व्यक्ति के सामने आगे बढ़ने के नए अवसर खुलते हैं। शिक्षा व्यक्ति को आत्मविश्वास* प्रदान करती है और उसे अपने जीवन में आने वाली विभिन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाती है *श्रीवास्तव ने नव साक्षरों से कहा कि वे शिक्षा के प्रति अपनी रुचि बनाए रखें तथा जो कुछ भी सीखें, उसका उपयोग अपने* दैनिक जीवन में करें। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।नव साक्षरों का सम्मान कर बढ़ाया उत्साह नव *साक्षर परीक्षा में शामिल महिला एवं पुरुषों का उत्साहवर्धन करते हुए उपस्थित अधिकारियों एवं शिक्षकों ने उनके प्रयासों* की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर शिक्षा प्राप्त करने के लिए आगे आना अपने आप में सराहनीय कदम है। *कार्यक्रम के दौरान नव साक्षरों को यह संदेश दिया गया कि सीखने की कोई उम्र निर्धारित नहीं होती। इच्छाशक्ति, लगन और* निरंतर प्रयास से व्यक्ति किसी भी उम्र में नई चीजें सीख सकता है। ऐसे प्रयास न केवल व्यक्ति के व्यक्तिगत विकास में सहायक होते हैं, बल्कि परिवार और समाज को भी *जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।उल्लास नव साक्षरता कार्यक्रम के माध्यम से प्रौढ़ महिला एवं पुरुषों* को साक्षर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भी रेखांकित *किया गया। परीक्षा में 13 महिला-पुरुषों की सहभागिता इस बात का परिचायक रही कि* शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।आकांक्षा रावत ने किया संचालन, वीरेंद्र कुमार सिंह ने माना आभार कार्यक्रम का संचालन *विद्यालय की प्रधानाध्यापिका  आकांक्षा रावत ने किया। उन्होंने कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण* भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में प्रभारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने उपस्थित अधिकारियों, शिक्षकों एवं अन्य सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त *किया।इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों एवं शिक्षकों ने नव साक्षरों को प्रोत्साहित करते हुए* शिक्षा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने और समाज में *साक्षरता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प दोहराया।*

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