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जिला दतिया सह.संपादक चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
रिपोर्टर चेतन दास सुखान
*महाराज अरुणादित्य ने दतिया की प्राचीन रामलीला पर डाला प्रकाश, भाजपा जिलाध्यक्ष माधवेंद्र सिंह परिहार ने परंपरा को पुनर्जीवित करने पर दिया जोर*
दतिया। श्रीरामलीला आयोजन समिति द्वारा आयोजित श्रीरामलीला मंचन का शुभारंभ मुख्य संरक्षक महाराज अरुणादित्य ने विधिवत दीप प्रज्ज्वलित कर एवं श्रीरामचरितमानस की आरती करके किया। इस अवसर पर भगवान शिव एवं श्रीरामचरितमानस की आरती उतारकर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। आयोजन में समिति के पदाधिकारियों सहित सिंधी समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में समिति के संरक्षक एवं भाजपा जिलाध्यक्ष माधवेंद्र सिंह परिहार, श्याम सुंदर सिंह, धरमू मुखिया, जगदीश सचदेवा, महेश गुलवानी, आनंद शर्मा एवं जितेंद्र पठारी सहित सिंधी समाज के गणमान्यजनों ने आरती में सहभागिता कर आयोजन के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।
इसी क्रम में श्रीरामलीला आयोजन समिति के अध्यक्ष मोहन अग्रवाल, कार्यवाहक अध्यक्ष दीपू सचदेवा, कोषाध्यक्ष कपिल श्रीवास्तव, मंच संयोजक लवी बाजवा, नीरज गूगोरिया, पार्षद रिंकू दुबे, पत्रकार रवि ठाकुर, पत्रकार शैलेन्द्र बुंदेला, पत्रकार विकास जड़िया एवं राजेंद्र पटवा सहित अन्य सदस्यों ने भी आरती में भागीदारी की।
दतिया की प्राचीन रामलीला पर डाला प्रकाश
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराज अरुणादित्य ने अपने संबोधन में दतिया की प्राचीन रामलीला की परंपरा और उसके ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने रामलीला की सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्ता को रेखांकित किया।
वहीं, भाजपा जिलाध्यक्ष माधवेंद्र सिंह परिहार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए दतिया की प्राचीन रामलीला परंपरा को पुनर्जीवित करने और उसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित झांसी के श्याम सुंदर सिंह ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया।
नारद मोह लीला का हुआ मंचन
कार्यक्रम का संचालन डॉ. विष्णु त्रिपाठी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन कार्यवाहक अध्यक्ष दीपू सचदेवा ने किया। रामलीला मंचन के प्रथम दिवस बलवंत मंडल द्वारा नारद मोह लीला का मंचन किया गया। इस धार्मिक प्रसंग के माध्यम से भगवान की लीला और भक्ति के महत्व को प्रस्तुत किया गया।
श्रीरामलीला आयोजन समिति के इस आयोजन में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक सहभागिता का संगम देखने को मिला।

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