करेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करेरा में फैली अव्यवस्थाएं अब जानलेवा साबित होने लगी हैं।??

KHABAR AAPTAK NEWS INDIA 
करेरा रिपोर्टर आलोक चतुर्वेदी 

शिवपुरी करेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करेरा में फैली अव्यवस्थाएं अब जानलेवा साबित होने लगी हैं। भारी अनियमितताओं और लापरवाही के चलते यहां की स्थिति बद से बदत्तर होती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि मानो आंखों पर पट्टी बांधकर बैठे हैं। ताजा और बेहद दर्दनाक मामला एक 13 वर्षीय मासूम बच्ची की मौत का है, जिसे समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाई। परिजन बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचे, उम्मीद थी कि यहां इलाज मिलेगा, लेकिन अस्पताल की बदहाल व्यवस्था ने उनकी उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया। ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध नहीं था या व्यवस्था इतनी लचर थी कि बच्ची को समय पर ऑक्सीजन नहीं दी जा सकी। कुछ ही देर में उसकी सांसें थम गईं। सवालों के घेरे में स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था
करेरा क्षेत्र का यह सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है, जहां आसपास के दर्जनों गांवों के मरीज निर्भर रहते हैं। बावजूद इसके— ऑक्सीजन जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव, स्टाफ की कथित लापरवाही, आपात स्थिति से निपटने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं, उपकरणों की कमी और अव्यवस्थित प्रबंधन। यह हादसा केवल एक मौत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर करारा तमाचा है। जिम्मेदार कौन? अब सवाल सीधा और तीखा है— क्या यह मौत सिर्फ बीमारी से हुई? या यह प्रशासनिक लापरवाही से हुई हत्या है? स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हों या स्थानीय जनप्रतिनिधि, सभी की जिम्मेदारी बनती है कि ऐसी घटनाएं न हों। लेकिन हकीकत यह है कि— निरीक्षण केवल कागजों में हो रहा है, रिपोर्टें ऊपर भेज दी जाती हैं, और जमीनी हकीकत पर कोई ध्यान नहीं देता। जनता की आवाज कौन सुनेगा? मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में पहले भी कई बार अव्यवस्थाओं की शिकायत की गई, लेकिन नतीजा शून्य रहा। अब एक मासूम की जान चली गई, फिर भी प्रशासन मौन है। यह सवाल हर नागरिक के मन में है— “अगर अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं मिलेगी तो इलाज कहां मिलेगा?” मांगें तेज क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि— इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, अस्पताल में तुरंत ऑक्सीजन, दवाइयों और स्टाफ की समुचित व्यवस्था की जाए। आक्रोश बढ़ता जा रहा है करेरा की जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर अब भी व्यवस्था नहीं सुधरी तो आंदोलन किया जाएगा। यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ सवाल है। अगर आज 13 साल की बच्ची को ऑक्सीजन नहीं मिली, तो कल किसी और की बारी हो सकती है। अब देखना यह है कि— प्रशासन जागता है या अगली मौत का इंतजार करता है?

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