KHABAR AAPTAK NEWS INDIA
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
रिपोर्टर चेतन दास सुखानी
दतिया आदेश बेअसर, रसूख का असर भारी… प्रशासन सिर्फ शर्मिंदा! ना खुलने का समय ना बन्द होने का समय अबकारी विभाग के द्रारा निर्धारित किया,न दुकाने पर रेट लिस्ट पवित्र नगरी बनी शराब का अड्डा धार्मिक नगरी में शासन के आदेश बेअसर साबित होते नजर आ रहे हैं। पहले आहाते बंद करने का फरमान जारी हुआ, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। शहर में शराब दुकानों का संचालन जारी है, वार्ड सीमाएं मौजूद हैं, मगर कागजों में स्पष्ट सीमांकन तक नहीं दिखाई देता।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है—जब सब कुछ “कागजों” में ही सीमित है, तो फिर कार्रवाई किस आधार पर होगी? या फिर यह मान लिया जाए कि नियम केवल आम लोगों के लिए हैं?
प्रशासनिक सख्ती सिर्फ फाइलों तक सीमित नजर आती है। छापेमारी महज औपचारिकता बनकर रह गई है, जबकि रसूखदारों पर कार्रवाई से हमेशा परहेज किया जाता रहा है। यह स्थिति कोई नई नहीं है, बल्कि पहले भी ऐसे कई उदाहरण सामने आ चुके हैं, जहां प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब सत्ता और प्रशासन का मौन आशीर्वाद साथ हो, तो कानून का डर आखिर किसे रहेगा?
आमजन में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर किस प्रशासनिक संरक्षण में यह सब “खुलेआम” चल रहा है। अब जनता जवाब चाहती है और प्रशासन की कार्यप्रणाली को करीब से देखना भी।
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