भोपाल जर्जर स्कूल भवनों को लेकर राज्य शिक्षा केंद्र सख्त, कलेक्टर से अनुमति लेकर तुरंत गिराने के आदेश*
KHABAR AAPTAK NEWS INDIA
प्रधान संपादक साहिल खान
भोपाल जर्जर स्कूल भवनों को लेकर राज्य शिक्षा केंद्र सख्त, कलेक्टर से अनुमति लेकर तुरंत गिराने के आदेश*
*जो भवन नहीं टूटे, उनके गेट पर लाल रंग से लिखना होगा- 'यह भवन जर्जर घोषित'*
भोपाल - मध्यप्रदेश में बारिश के मौसम में जर्जर स्कूल भवनों में हादसों को रोकने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने बड़ा आदेश जारी किया है। संचालक राज्य शिक्षा केंद्र हरजिंदर सिंह और आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह ने संयुक्त आदेश में सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि जो भी शासकीय शाला भवन जीर्ण-शीर्ण, जर्जर या अनुपयोगी हैं, उन्हें तुरंत ध्वस्त किया जाए।
राज्य शिक्षा केन्द्र, पुस्तक भवन, बी-विंग, अरेरा हिल्स भोपाल से 17 अगस्त 2026 को जारी पत्र क्रमांक /रा.शि.के./निर्माण-5/2026/4697-4698 के अनुसार, विभाग ने स्पष्ट किया है कि मैनुअल भाग-1 कंडिका 3.039 के अनुसार ऐसे भवनों को Dismantle (ध्वस्त) करने की अनुमति कलेक्टर द्वारा प्रदत्त है। इस अनुमति के बाद शीघ्र ध्वस्त कराने की कार्यवाही नियमानुसार की जाए।
*गेट पर लगेगा लाल रंग का चेतावनी बोर्ड*
आदेश में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि यदि किसी भी परिस्थिति में जर्जर भवन को ध्वस्त करने की कार्यवाही नहीं हो पाई है, तो उस भवन के मुख्य द्वार या बाहरी दीवार पर स्पष्ट और दूर से दिखाई देने वाला 3x3 फीट का क्रॉस (X) का निशान गहरे लाल रंग से अंकित किया जाए।
साथ ही उसी दीवार पर चेतावनी नोटिस भी चस्पा करना होगा, जिसमें बड़े अक्षरों में लिखा हो कि - "यह भवन जर्जर / ध्वस्त घोषित किया जा चुका है और इसे खाली करने या गिराने के आदेश जारी किए गए हैं।"
ताकि बच्चे, शिक्षक, अभिभावक और आम नागरिक गलती से भी उस भवन में प्रवेश न करें।
*जीर्ण-शीर्ण भवनों में कक्षा पूरी तरह प्रतिबंधित*
आदेश के दूसरे बिंदु में कहा गया है कि जो भवन जीर्ण-शीर्ण की श्रेणी में हैं, ऐसे भवनों को नियमानुसार वर्गीकरण (क्लासिफिकेशन) की कार्यवाही अति शीघ्र की जाए। तथा किसी भी परिस्थिति में ऐसे भवनों में कक्षा संचालित न की जाए।
यानी अब कोई भी प्रधानाध्यापक या प्रभारी यह बहाना नहीं बना सकेगा कि वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, इसलिए जर्जर भवन में ही क्लास लगा रहे हैं। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।
*कलेक्टर और जिला पंचायत CEO को भी भेजी कॉपी*
इस आदेश की प्रतिलिपि प्रदेश के सभी कलेक्टर, संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को भी भेजी गई है। ताकि ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में राजस्व और पंचायत विभाग से समन्वय में देरी न हो।
गौरतलब है कि प्रदेश में कई जिलों में अभी भी सैकड़ों शासकीय स्कूल भवन ऐसे हैं जो 30 से 40 साल पुराने हैं। कई जगह छत से प्लास्टर गिरने, दीवारों में दरार आने और बरसात में पानी टपकने की घटनाएं सामने आती रही हैं। हाल ही में कुछ जिलों में जर्जर भवन का हिस्सा गिरने से अफरा-तफरी भी मची थी। इसके बाद ही राज्य स्तर पर यह सख्त निर्देश जारी किया गया है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस आदेश के बाद जिलों में जर्जर भवनों का फिजिकल वेरिफिकेशन तेज होगा और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
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