लबारिस महिला के शव के साथ अमानवीय व्यवहार।

KHABAR AAPTAK NEWS INDIA
दतिया ब्यूरो दीपक श्रीवास्तव
रिपोर्टर चेतन दास सुखानी

दतिया के इंदरगढ़ में इंसानियत शर्मसार : अर्धविक्षिप्त महिला के शव के साथ अमानवीय व्यवहार, प्रशासन पर उठे सवाल। 
दतिया। दतिया जिले की इंदरगढ़ तहसील से मानवता को झकझोर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। बीते कुछ दिनों से इंदरगढ़ क्षेत्र में रह रही एक अर्धविक्षिप्त महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। स्थानीय लोगों का अनुमान है कि महिला की मौत भूख और ठंड के कारण हुई। सुबह सड़क किनारे महिला का शव देखे जाने के बाद लोगों ने तत्काल स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद को सूचना दी। समाजसेवियों द्वारा बार-बार फोन किए जाने के बावजूद मौके पर एंबुलेंस नहीं पहुंची। काफी देर बाद नगर परिषद ने अपना कचरा वाहन भेज दिया। हैरानी की बात यह रही कि वाहन के साथ कोई कर्मचारी भी मौजूद नहीं था, मजबूरन वहां खड़े लोगों ने ही महिला के शव को कचरा वाहन में रखवाया।
पोस्टमार्टम के बाद जब शव को दफनाने की प्रक्रिया शुरू हुई, तब एक बार फिर अमानवीयता की हदें पार होती दिखीं। शव दफनाने के लिए जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदा गया। शव पर मात्र एक कपड़ा डालकर, हाथों से मिट्टी डालने के बजाय जेसीबी से ही मिट्टी डालकर दफन की औपचारिकता पूरी कर दी गई। इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीरें सामने आने के बाद जिलेभर में आक्रोश फैल गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि एंबुलेंस थोड़ी देर से पहुंची और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके प्रयास किए जाएंगे। हालांकि, यह बयान लोगों की संवेदनाओ के प्रति नाकाफी साबित हुआ। एक बेसहारा, मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला के शव के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल अमानवीय है, बल्कि यह दर्शाता है कि शासन-प्रशासन की संवेदनाएं आम नागरिकों के प्रति खत्म होती जा रही हैं। महिला को न तो दो गज कफन नसीब हुआ, न ही सम्मानजनक अंतिम संस्कार। अब सवाल यह है कि इस मामले के उजागर होने के बाद जिला प्रशासन स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।

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